Tuesday, January 11, 2022

Hindi Poem - Kahin aur

 मुझे देखकर जो तुम्हारी साँसें रुकी हैं

इनसे पूछना इस प्यार का सच क्या है

ये जो तुम्हारी दिल में ध़ड़कन छुपी है

दुनिया से उस्का कवच क्या है

 

ये मानने से हम क्यूँ घबराते हैं

की हमें भी कभी ज़रूरत होती है

ये जो अनसुनी सी हमारी बातें हैं

इन्हे सुनाने की भी ज़रूरत होती है

ये जो हमारे ख्वाब हमें डराते हैं

उन्हें एक हसीं सपना कोई खास बनाता है

फिर भी हम कहने से कतराते हैं

और इसी डर से वो सपना टूट जाता हैं

 

आखिर सपना ही तो है ये ज़िंदगी

हँसने का, मुस्कुराने का, और यादें भर जाने का

हमारी गलती है की हम इसे बनाते हैं

गिरने का, रुक्ने का, और दिल टूट जाने का

 

लेकिन ये दिल टूट्ना भी क्या होता है

हमारी गलती हमने दिल तुमसे लगाया

सब कुछ पाकर भी इंसान कुछ खोता है

तुमने यही प्यार तो मुझे सिखाया

 

अब वक्त है की इस सीख को लेकर

मै कहीं और सावधानी से दिल लगाऊँ

आखिर तुम भी तो यही चाहती थी

कि मैं किसी और का हो जाऊँ 

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