कुछ प्यार यूं मेरे अंदर ही ढल जाएगा
यह एक तरफ़ा पागलपन खुद ही संभल जाएगा
जब उस खुदा का निर्णीत एक कल आएगा
मेरे ईमान और दर्द का ज़रूर कोई तो फल आएगा
सुना है तुम मेरी वफ़ा का फल बन कर आयी हो
अपने साथ अरमानों का एक गुलदस्ता भी लेकर आयी हो
माफ़ करना मुझे, मेरा रोने का कोई इरादा नहीं था
पूरा हो पाए जो प्यार की ख़ातिर, मैंने देखा कोई वादा ही नहीं था
यहाँ तो हर मोड़ पर , हर कोई प्यार का इंतज़ार कर रहा है
जिससे दिल लगाए बैठा है, उसी के प्यार की कहानियाँ सुन रहा है
मैंने भी वैसे किस्से कहाँ तुमको बताये हैं
मुझे भी मालूम है की हम सब प्यार के थोड़े थोड़े सताये हैं
अपनी चाय की प्याली में हम उम्मीद घोल कर पीते थे
यूँ ही सताए सही, हम हल्का मुस्कुरा कर ही जीते थे
पत्तों के बीच से छुपके आने वाली धुप की किरण के जैसी तुम आना, हम दिल से मुस्कुरायेंगे
ख़ुशी से सींच सींच कर एक प्यारी फुलवारी हम भी बनाएंगे
जो पथिक प्रेम का सताया हुआ उस बगीचे में आएगा
प्रतिदत्त प्रेम की सौम्यता वह भी देख पायेगा
किस्मत में जो लिखा हो उससे हम कहाँ लड़ सकते हैं
मगर प्यार के ज़खम भी हम लोग ऐसे ही तो भर सकते हैं
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