Friday, January 14, 2022

Hindi poem - Tum

 ज़िन्दगी में आ गई तो क्या ख़ास किया 

रह जाओ तब ना कोई बात हुई 

उसके आने से सवेरा हुआ तो क्या हुआ    

उसके जाने पर तो रात हुई 


तुम्हारा नाम सुनने पर यूं रूह खिल उठती है 

यह अहसास तुम्हे क्या मालूम 

जब झील सामने हो मगर उम्मीद भंग हो 

वैसी प्यास तुम्हे क्या मालूम 


एक दिन यह नक़ाब छोर कर 

दिल और जुबां खुद की तरफ़ मोड़ कर 

पूछना अपने अंतःकरण से तुम यह बात 

क्या यूहीं फीके और अधूरे हैं तुम्हारे जज़्बात 


शायद तुम्हे इतना जानता हूँ कि सच कह सकूँ 

कि तुम नाज़ुक प्रतीत होने से घबराती हो 

तुम चाहो या ना चाहो मैं जानता हूँ 

खुद को तुम मेरा नाम लेकर ही सताती हो 


मीलों दूर थे हम और मैंने तुम्हे छुआ भी नहीं था 

लेकिन आज भी यहीं हूँ, कहीं तुम्हारा दिल जो बदल जाए 

मैंने दिल से पूछा तो उसने बस इतना माँगा 

की तुम्हारे नाम के बाद मेरा उपनाम लग जाए | 

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